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लगता है कि तुम हो | Lagta Hai Ki Tum Ho | Beautiful Thought | Think Tank Akhil

लगता है कि तुम हो | Lagta Hai Ki Tum Ho
लगता है कि तुम हो 



राहत सी जो दे जाए तो लगता है कि तुम हो
परछाई कोई लहराए तो लगता है कि तुम हो।

जब बारिश के सुहाने मौसम में
कोई बूंद टकराए तो लगता है कि तुम हो।

काली तन्हाँ रातें जब सताए
चैन कहीं ना आए तो लगता है कि तुम हो।

समुंदर की बलखाती लहरों में
कोई मोती उतर जाए तो लगता है कि तुम हो।

कंकरीले पथरीले चट्टानों में
कोई झरना बह जाए तो लगता है कि तुम हो।

सुनसान गुजरती अकेली राहों में
कोई हाल पूछ जाए तो लगता है कि तुम हो।

✍️ -अखिलेश द्विवेदी

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