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Akhir Kyu Hai Itna Pareshan Aadmi | आखिर क्यों है इतना परेशान आदमी | By- Akhilesh Dwivedi | Think Tank Akhil

💭💭 आखिर क्यों है इतना परेशान आदमी करता सब पर है बस एहसान आदमी कैसे भुला है गीता कुरान आदमी बनता है खुद से क्यों अंजान आदमी। एक अजनबी को है देना सहारा उसे खुद को देखता है क्यों परेशान आदमी। एक तरफ है उम्मीदें हज़ारों से जो खुद न करता कभी जैसा काम आदमी। आज सोचा बहुत कुछ न आया समझ क्यू है बनता सच से अंजान आदमी। अगर सहारा बने तो साथ पर्वत चढ़े पर खुशी देख है क्यों हैरान आदमी। किसी की लाठी, किसी का नयनतारा बने बनता खुद में है खुद भगवान आदमी। जो मिलेगा यहां सब यही रहना है करता क्यों नहीं है अच्छे काम आदमी। ✍  अखिलेश द्विवेदी Folks, If you like the post, comment below and do share your response. Thanks for reading 😃

चैन से सोना चाहता हूं- Chain se Sona Chahta hoon | By Akhilesh Dwivedi | Think Tank Akhil

सोना चाहता हूं यह दरवाज़े पर कोई पहरा लगा दो  खुद में खोना चाहता हूं मैं। बंद कर दो सारी खिड़कियां मेरे घर की की अब मैं चैन से सोना चाहता हूं। उसकी ज़रूरत मुझे अभी बहुत है अब उससे दूर होना चाहता हूं। अब कोई दिया रोशन ना करना अंधेरे में खोना चाहता हूं मैं। कुछ नए गम दे जा इन सूखी आंखों को मैं फिर से पलकें भिगोना चाहता हूं। था जिस पतवार का सहारा उसे तोड़ दिया अब यह दरिया सुखाना चाहता हूं। ✍  अखिलेश द्विवेदी Friends, If you like the post, comment below and do share your response. Thanks for reading 😃

ज़रूरी है | Zaruri Hai | By Akhilesh Dwivedi | ThinkTank Akhil

ज़रूरी है यह शहर है अनजानों का, नए हैं सब यहां गुजार सकूं कुछ दिन तो जान पहचान ज़रूरी है। कहां घूमते हैं गलियों में आवारा इस शहर में अपना एक मकान ज़रूरी है। उन्हें इश्क़ हो किसी से भला यह मुनासिब कहां है  हर गली में हो उसका कद्रदान ज़रूरी है। कहां जाओगे जब निकलोगे घर से बाहर मंज़िल मिले जहां ऐसा स्थान ज़रूरी है। ना जाने किस भीड़ में वो खो गई अमानत मेरी बची इंसानियत हो जिसमें वो इंसान ज़रूरी है। जाति, धर्म और भाषाओं में बांट दिया है फायदे के लिए हमारे लिए तो बस भारत की शान ज़रूरी है। ✍️ -अखिलेश द्विवेदी Follow Friends, If you like the post, comment below and do share your response. Thanks for reading 😃

क्या जाने? Kya Jane? | By Akhilesh Dwivedi | Think Tank Akhil

जो नदी किनारे आया ही नहीं वो दरिया की गहराई क्या जाने। जो झूठ के बल पर जीत गया भला वो सच्चाई क्या जाने। जिसे प्यार कभी हुआ ही नहीं वो दर्द तन्हाई का क्या जाने। जो खुद के पास रहा ही नहीं वो तुमसे बिछड़कर क्या जाने। जो धूप में कभी जला ही नहीं वो छाँव की कीमत क्या जाने। ✍️ -अखिलेश द्विवेदी Follow Friends, If you like the post, comment below and do share your response. Thanks for reading 😃

क्या इसी लिए हमने आजादी पाई थी | Kya Isi Liye Humne Azadi Paai Thi | Independence Day | Think Tank Akhil

क्या इसी लिए हमने आजादी पाई थी? धर्म के नाम पर गला काट दिया भाषाओं के नाम पर हमें बांट दिया, फूलों को भी हमने उनकी जाति बताई थी, क्या यही सोचकर उन लोगों ने यह क्रांति चलाई थी? क्या हुआ उनके सपनों का, जो सोचा था उन वीरों ने, जिस अखंड भारत के लिए वो जकड़ गए जंजीरों में, क्या उनके मन में भी कभी सत्ता की लालच आई थी? क्या इसी लिए हमने आजादी पाई थी? बेटियां गर्भ में मरती हैं या फिर मरती हैं अंधियारों में, क्या इसी भारत के लिए वो थे चारदीवारों में? जो सोचा था उन लोगों ने बस एक ख्याली खीर बनाई थी, क्या इसी लिए हमने आजादी पाई थी? ✍️ -अखिलेश द्विवेदी Follow Friends, If you like the post, Comment below and do share your response. Thanks for reading 😃

कैसे? | Jo Dikh Raha Use Chhipaye kaise | Emotional Lines | Think Tank Akhil

कैसे? जो दिख रहा है उसे छिपाएं कैसे जमाने की चाहत है जो वो बन जाएं कैसे। महफिल लगाना तो बहुत दूर की बात रही फैसला हो की खुद की आबरू बचाएं कैसे। ना जाने कितने आए तोड़ने हौसले जो कभी भुला नहीं उसे भूल जाएं कैसे। मिट्टी की याद मिटा देना आसान नहीं है अपने शहर को छोड़कर कहीं जाए कैसे। लोग रोते रहे, सबको रुलाते रहे खुश आंखों के आंसू को हम छिपाएं कैसे। हर नज़र को ना अच्छे दिखे हम एक बूंद को समंदर नज़र आए कैसे। ✍️ -अखिलेश द्विवेदी Follow Friends, If you like the post, comment below and do share your response. Thanks for reading 😃

Most Beautiful Lines- Hindi Poetry- Amazing Thoughts- Emotional Poetry-Think Tank Akhil

Most Beautiful Lines- Hindi Poetry- Amazing Thoughts- Emotional Poetry यूं तो रोज होता था मिलना हमारा पर वो मुलाकात कुछ खास थी। जब बैठी थी वो सामने मेरे, आंखों में देखते रहने की प्यास थी। मंदिर की शंख की धुन था मैं, वो मस्जिद की उठती अजान थी। मै पंडित जनेऊ धारी था वो एक बुरखे वाली नारी थी। मै मंदिर जाता कभी कभी, वो दिन में ५ नमाज़ी थी। मिन्नतें भगवान की करता था मैं, वो खुद मंदिर की एक मूरत थी। मै ढूंढता रहता था जिसको, वो एक सुन्दर सी सूरत थी। मै गीता का एक हिस्सा था, वो पूरा पवित्र क़ुरान थी। ✍️ -अखिलेश द्विवेदी Follow Friends, If you like the post, Comment below and do share your response. Thanks for reading 😃

Beautiful Lines- Emotions and Actions- Emotional Lines-Think Tank Akhil

Beautiful Lines- Emotions and Actions- Emotional Lines She kept checking my last seen I was waiting for her. She kept checking my breath, My heart was beating for her. She kept looking my way, I was busy with her in my dreams. She kept looking at my features, I was planning my future with her. She kept waiting for Proposal, I was considering her my would be. She kept wishing how should I be, I was changing myself according to her. She was asking for promises, I was thinking to give my words. Only a few things were common that we think or do. We kept waiting for one another for long. Sometimes she used to come late Or sometimes I reach early. She wanted to be mine, I decided to be her, what she would want. ✍️ -Akhilesh Dwivedi Follow Friends, If you like the post, Comment below and do share your response. Thanks for reading :)

वो आखिरी एहसास | Wo Aakhiri Ehsash- Emotional And Sad Love Story-Think Tank Akhil

वो आखिरी एहसास  एक लम्बे अर्शे का हमारा साथ रहा हर सुबह सूरज उसकी बातों के साथ उगा वो हँसती हुई गुड मॉर्निंग की आवाज जब कहती थी वो मिलना है फिर से वहीं आज एक लम्बा वक़्त था जो हमने ऐसे ही गुजरा सब जानते हुए भी वो ना करती थी किनारा। वो हर सुबह मुझे कॉल करके जगाना फिर जगते ही गुड बॉय से सराहना बड़ी जिम्मेदारी से यह हर रोज निभाना उसको होता था पता की जगा हूँ मैं फिर भी मुझे अपनी प्यारी सी मुस्क़ुराहट सुनाना वो लम्बा वक़्त जब हम बस देखते और मुस्कुराते जब भी मिलते खुशियों का हशीन तोहफ़ा दे जाते। सब कुछ ठीक था हमारे दरमियाँ अचानक सागर ने किनारे की तरफ मोड़ दी थी किश्तियाँ वो दिन भी आया जब थी उसकी सगाई न जाने कैसे रात 12 उसकी कॉल आई मजाक में ही मैंने उसको आंटी बुलाया आंटी किसको बोला यह जवाब भी पाया वो आखिरी लम्हाँ था जब मैं उसके साथ था मुस्कुराया। वो बोली मुझे माफ़ करना मम्मी पापा के लिए है यह करना दिल रुआंसा, फिर भी कहा गर्व है मुझे तुम साथ दो उनका यह हक़ है उन्हें। अचानक कमरे में संन्नाटा छा गया सिसकियों की...

Beautiful and Lovely Lines- So Relatable Hindi Poetry-Think Tank Akhil

Beautiful and Lovely Lines- So Relatable Hindi Poetry अभी नया हूँ तुम्हारे शहर में रहूँगा कुछ दिन ज़िन्दगी के सफर में मर्जी है बेवजह भूल जाना मुझको मुसाफ़िर हूँ चल पडूंगा किसी नयी डगर में।।1।। तुम्हे भी होगा असर वक़्त के बीत जाने के बाद सिर्फ करते रहोगे याद मेरे जाने के बाद।।2।। जो सबसे अच्छा था वो अचानक सबसे बुरा हो गया कुछ तो था ऐसा जो तुम्हे लगा की वो अब जुदा हो गया।।3।। ना उससे इन्कार होता है ना उससे इज़हार होता है, मै बेखबर सबसे हूँ यारो क्या ऐसे ही प्यार होता है? ।।4।। हर बात पर नाराज नहीं होता हूँ मैं ना जाने कितने, अर्शे पहले ही बिछड़ गये होते।।5।। वो रूठते रहे, हम मानते रहे एक अजीब सा रिश्ता निभाते रहे, कहने को एक लम्बा अर्शा गुजारा साथ हमने उलझी न थी ज़िन्दगी हम फिर भी उसे सुलझाते रहे।।6।। खूबसरत सी थी जिंदगी मेरे आने से। शायद इसी वजह से तेरी दुश्मनी हो गयी जमाने से।।7।। बेशब्री से करता रहा मै इंतज़ार क्या नहीं हुआ था उसको मुझसे प्यार, ना जाने कौन सी बंदिशो से वो डर गया चाह कर भी वो ना कर सका इज़हार।।8।। बस ...

मेरी डायरी | Meri Diary | Life Experience | Think Tank Akhil

💮  मेरी डायरी  💮 पूछा एक दिन बंद पड़ी डायरी के पन्नो ने क्या दूर चला गया इनमे रहने वाला। उठा ली कलम लिखने को तुम्हारी यादें पर यादों के समुन्दर में खोया नहीं गया।। वो पड़ी थी बंद दराजों पर करते हुए इंतज़ार सोचती थी कभी तो आएगा उसका यार। हर वक़्त उसकी रुस्वाइयों  को देखकर उसे लगने लगा अब बेगाना हो गया उसका प्यार।। अचानक एक आँधी सी आयी उसकी सारी खुशियाँ मानो मोड़ सी लायी। पहले पन्ने पर ही लिखा था उसका प्यार वादा रहा लौटकर आऊंगा मेरे यार।। खिलखिला उठी डायरी उन हवा के झोको में जैसे मिल गया हो कोई उन दरख्तों में। आज उसकी खिलखिलाहट भी मुझे भा गयी उस आंधी के साथ डायरी में बहार सी छा गयी।। मैं खुश था उसकी यादों को देखकर शायद वो भी खुश हो कुछ ऐसा ही सोचकर। वो जाने कब तक करती रहेगी इंतज़ार कभी तो आएगा ही लौटकर उसका यार।। उस बंद डायरी की मायूशियाँ मुझसे ना देखी गयी सारी बातें उसकी रात भर चुभती रही। उठा लिया डायरी लिखने को उसकी यादें पर वो दिल से डायरी में न सहेजी गयी।। ✍️- अखिलेश द्विव...

Some Own Creations- Hindi Shayari- So Relatable-Think Tank Akhil

Some Own Creations- Hindi Shayari- So Relatable 1- वो चाह कर भी नजरे ना मोड़ सके मुझसे ना पा ही सके मुझको ना दूर रहे मुझसे। । 2- चला जाता हु कही भी बिना कुछ बताये भटका मुसाफिर हूँ शायद पनाह मिल जाये। । 3- ऐसा लगता है कमजोर हो गया हूँ मैं इन आँखों ने ही धोखा दे दिया। जहाँ रुकते नहीं थे कभी बारिश के पानी आँखों ने ही आंशुओँ का शैलाव कर दिया।।  4- तुम्हारी यादो में युँ ही सिमट गए हम तुमसे दूर जाना तो एक बहाना था। देखा था तुम्हे मुस्कुराते अकेली राहों में मैं समझ ना सका की क्या अफसाना था। । 5- ज़माने में अपने थे या अपनों का जमाना था मैंने तो बस इतना ही जाना की मुझसे ही जमाना था। ।  6-  ज़िन्दगी में मिली तो हज़ारो चीजे थी पर वो सबसे अलग थी जो किश्मत में न थी। 7-  ज़िन्दगी ने न जाने कितने गम दिए फिर भी क्या हुआ हम मुस्कुराये और चल दिए।। ✍- अखिलेश द्विवेदी 

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