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क्या इसी लिए हमने आजादी पाई थी | Kya Isi Liye Humne Azadi Paai Thi | Independence Day | Think Tank Akhil

क्या इसी लिए हमने आजादी पाई थी? धर्म के नाम पर गला काट दिया भाषाओं के नाम पर हमें बांट दिया, फूलों को भी हमने उनकी जाति बताई थी, क्या यही सोचकर उन लोगों ने यह क्रांति चलाई थी? क्या हुआ उनके सपनों का, जो सोचा था उन वीरों ने, जिस अखंड भारत के लिए वो जकड़ गए जंजीरों में, क्या उनके मन में भी कभी सत्ता की लालच आई थी? क्या इसी लिए हमने आजादी पाई थी? बेटियां गर्भ में मरती हैं या फिर मरती हैं अंधियारों में, क्या इसी भारत के लिए वो थे चारदीवारों में? जो सोचा था उन लोगों ने बस एक ख्याली खीर बनाई थी, क्या इसी लिए हमने आजादी पाई थी? ✍️ -अखिलेश द्विवेदी Follow Friends, If you like the post, Comment below and do share your response. Thanks for reading 😃

कहते हैं इसे कोठा | Kotha | A Bitter Truth Of Society | Hindi Poetry | Think Tank Akhil

सूरज के ढलते ही लग जाता है बाजार कोई अता हवस मिटाने, कोई करता सच्चा प्यार, जगह बदलते मतलब बदला, अपना कोई ना होता मिटती है यहां भूख हवस की, कहते हैं इसे कोठा। ना होते हैं माँ बाप, ना होता घर परिवार ना कोई किसी की बेटी, ना किसी भाई का प्यार आता जो भी यहाँ पर बस जिस्म का मतलब होता होता है बाजार जिस्म का, कहते हैं इसे कोठा। सब भूख की बात है प्यारे, चाहे पेट हो या हो तन सब हो जाते हैं गायब, जैसे भरता मन मिट जाती अगर भूख जगत की ऐसा कभी ना होता जिन्दा बिकते मुर्दा बनकर, कहते हैं इसे कोठा।  ✍️ -अखिलेश द्विवेदी Follow Friends, If you like the post, comment below and do share your response. Thanks for reading 😃

कहां तक पहुंचें | Hum Teri Chah Me Kahan Tak Pahuche- Amazing Lines | Think Tank Akhil

हम तेरी चाह में ऐ यार! कहां तक पहुंचें, ना है पता ना ठिकाना की कहां तक पहुंचें। कई रास्ते बदले, मोड़ आए कई, ना जाने किस गली किस जगह पहुंचें। लोग आते रहे, लोग जाते रहे अब रास्ते ना जाने कहां तक पहुंचें। मेरी कामयाबियां गिनाती हैं महफिलें मेरी नाकामियां ना जाने कहां तक पहुंची। मंजिलें भी अपनी थीं, रास्ते भी थे अपने मंजिल दे दिखाई बस उस जगह पहुंचें। आंखों में लिए सपने यूं आगे बढ़ा था पूरा हो सके यह जहां बस वहां पहुंचें। ✍️ -अखिलेश द्विवेदी FOLLOW Friends, If you like the post, Comment below and do share your response. Thanks for reading 😃

Emotional Story- एक सपना- Sad Love Story- Beautiful Emotions- Think Tank Akhil

एक सपना  एक रात तुम सपने में आये थे। किसी बात से नाराज़ लग रहे थे। लगा कुछ रिश्ते तुमने ख़ास रखे थे। अपने एहसासों  के कुछ सवाल रखे थे। मेरे ही आगे मेरे कामों के हिसाब रखे थे। शायद मैं समझ ना सका। शायद यह वही काम थे जिन्हे तुम्हारे लाख मना करने पर भी मैंने किया। शायद यह वही काम थे जिन्हे तुम अक्सर मुझसे दूर रखने को कहा करती थी। शायद यह वही काम थे जिन्हे मैंने तुमसे ज्यादा वरीयता में रखा। शायद यह वही लोग हैं जिन्हे मैंने तुमसे आगे रखा। अरे हाँ, यह वही गलतियां है जो होने से बचाई जा सकती थी लेकिन मैने तुम्हारी एक ना सुनी। काश!! मैं उस वक़्त तुम्हारी बातें मान लेता। काश!! उस दिन तुम्हारे साथ वो एक छोटा सा रास्ता पैदल चल लेता। काश!! मैं तुम्हारी बातें उस वक़्त मान लेता, तो आज शायद! शायद नहीं यक़ीनन तुम मेरे साथ होती, और मैं उन बातों को याद करके हँसता। काश!! मैं मोड़ पाता वो पल जब तुमने अलविदा कहा था। शायद! शायद नहीं पूरा भरोसा है मुझे, मैं तुम्हे जाने से रोक लेता। लेकिन अब तुम बहुत दूर जा चुकी हो। अब चली गयी तो कोई शिकवा नहीं, कोई शिकायत नहीं। बस दुआ ...

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