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Showing posts with the label Sad Love Story

कैसे? | Jo Dikh Raha Use Chhipaye kaise | Emotional Lines | Think Tank Akhil

कैसे? जो दिख रहा है उसे छिपाएं कैसे जमाने की चाहत है जो वो बन जाएं कैसे। महफिल लगाना तो बहुत दूर की बात रही फैसला हो की खुद की आबरू बचाएं कैसे। ना जाने कितने आए तोड़ने हौसले जो कभी भुला नहीं उसे भूल जाएं कैसे। मिट्टी की याद मिटा देना आसान नहीं है अपने शहर को छोड़कर कहीं जाए कैसे। लोग रोते रहे, सबको रुलाते रहे खुश आंखों के आंसू को हम छिपाएं कैसे। हर नज़र को ना अच्छे दिखे हम एक बूंद को समंदर नज़र आए कैसे। ✍️ -अखिलेश द्विवेदी Follow Friends, If you like the post, comment below and do share your response. Thanks for reading 😃

उसकी याद में आंखें नम कर के रोया | Usaki Yaad Me Ankhe Nam Karke Roya- Emotional Poem By Akhilesh Dwivedi | Think Tank Akhil

उसकी याद में आंखें नम कर के रोया अकेले राहों में हर कदम पर रोया, तनहाई अकेले नहीं मिटती कभी कभी वो मिला तो उससे बिछड़ कर रोया। बहार आई कई बार उसके दरवाजे पर कभी ओस तो कभी बारिश बनकर रोया। रोज सोया नहीं मै मखमल के बिस्तर पर कभी पत्थर को मखमल समझकर सोया। वो पल नहीं जब वो याद ना आए उसकी यादों के तकिए से लिपटकर रोया। ✍️ -अखिलेश द्विवेदी Follow Friends, If you like the post, Comment below and do share your response. Thanks for reading 😃

होगा असर वक़्त के बीत जाने के बाद | Hoga Asar Waqt Ke Beet Jaane Ke Bad- Emotional Lines | Think Tank Akhil

होगा असर वक़्त के बीत जाने के बाद तुम्हे भी होगा असर वक़्त के बीत जाने के बाद कभी तो आऊंगा याद, चले जाने के बाद, खुश तो बहुत थे तुम मुझे पाने के बाद  अब दर्द के भी लुत्फ उठाना मेरे जाने के बाद। यूँ तो हर लम्हा गुजारा था खुशियों में हमने इन पलकों को भीगाना मेरे जाने के बाद, अभी अभी तो सामने था मैं, कब ओझल हो गया असर होगा इसका भी मेरे जाने के बाद। कभी रिश्ते ना संभाले गए तुमसे हमारे अब यादे संभालना तुम मेरे जाने के बाद। ✍️ -अखिलेश द्विवेदी Follow Friends, If you like the post, Comment below and do share your response. Thanks for reading 😃

Beautiful Love Story-वो सर्द नवंबर की रात-Story With Full of Feelings- Think Tank Akhil

वो सर्द नवंबर की रात मुझे आज भी याद है। वो रेलवे स्टेशन पर  ट्रेन का इंतज़ार मुझे आज भी याद है। सिलसिला शुरु हुआ था गर्मियों में मगर अब आग लगने से भड़कने के लिए वक़्त तो लगता है। नवंबर में ही मेरा बर्थडे आता है, और उसके ठीक २-३ दिन पहले उसे कहीं जाना पड़ा। मन था जाने का या जाना मज़बूरी थी कुछ कह नहीं सकता था। वो शाम मुझे आज भी याद है जब वो जाने से पहले मिलने आई थी। बर्थडे की शुभकामनाये देते हुए बोली, “बर्थडे पार्टी में मैं तो नहीं रहूँगी, तुम मस्ती करना।” किश्मत देखो,  दिल्ली में कुछ ८-९ स्टेशन हैं लेकिन उसकी ट्रेन भी वही से थी जहाँ मुझे मेरे अंकल को छोड़ने जाना था और दोनों की ट्रेन लेट थी। मुझे बड़ा भरोसा है मेरी आँखों पर की यह बहुत तेज़ हैं। अचानक वो मुझे दिख गयी। अपने भी एहसासो का तूफ़ान उमड़ गया। उसके साथ वाली सीट खाली करवाकर आंटी जी को बिठाया और फिर फ़िराक़ में लग गया की वो एक बार देख ले मुझे। बहुत असफल प्रयास किये, उसके सामने थोड़ी दूर पर खड़ा हो गया और वो ईयरफ़ोन लगाए गाने सुनने में या फिर अपनी बहन से बाते करने में व्यस्त थी। जब वो एक महीने बाद आई तब पता चला की वो मेरी ही बा...

Emotional Story- एक सपना- Sad Love Story- Beautiful Emotions- Think Tank Akhil

एक सपना  एक रात तुम सपने में आये थे। किसी बात से नाराज़ लग रहे थे। लगा कुछ रिश्ते तुमने ख़ास रखे थे। अपने एहसासों  के कुछ सवाल रखे थे। मेरे ही आगे मेरे कामों के हिसाब रखे थे। शायद मैं समझ ना सका। शायद यह वही काम थे जिन्हे तुम्हारे लाख मना करने पर भी मैंने किया। शायद यह वही काम थे जिन्हे तुम अक्सर मुझसे दूर रखने को कहा करती थी। शायद यह वही काम थे जिन्हे मैंने तुमसे ज्यादा वरीयता में रखा। शायद यह वही लोग हैं जिन्हे मैंने तुमसे आगे रखा। अरे हाँ, यह वही गलतियां है जो होने से बचाई जा सकती थी लेकिन मैने तुम्हारी एक ना सुनी। काश!! मैं उस वक़्त तुम्हारी बातें मान लेता। काश!! उस दिन तुम्हारे साथ वो एक छोटा सा रास्ता पैदल चल लेता। काश!! मैं तुम्हारी बातें उस वक़्त मान लेता, तो आज शायद! शायद नहीं यक़ीनन तुम मेरे साथ होती, और मैं उन बातों को याद करके हँसता। काश!! मैं मोड़ पाता वो पल जब तुमने अलविदा कहा था। शायद! शायद नहीं पूरा भरोसा है मुझे, मैं तुम्हे जाने से रोक लेता। लेकिन अब तुम बहुत दूर जा चुकी हो। अब चली गयी तो कोई शिकवा नहीं, कोई शिकायत नहीं। बस दुआ ...

Love Story- देर हो जाती कैसे- Emotional- Hindi Love Story- Think Tank Akhil

यह सिर्फ कहानी ही नहीं बल्कि दो दिलों की दास्तान है। जिसमे चाहते तो दोनों थे एक दूसरे को लेकिन किसी बात का डर हमेशा रहता। उसकी बड़ी बड़ी ऑंखें और उसके रेशमी बाल अक्सर जो उसके चेहरे पर आ जाते थे उसकी सुंदरता में चार चाँद लगा जाते। वो अक्सर कहती थी तुम बड़े अट्रैक्टिव हो पता नहीं क्यों बस तुम्हारे साथ रहने को दिल चाहता है। अक्सर वो दूरियां  बनाये रखती थी लेकिन जब मुझे पता था की उसे मेरे साथ रहना अच्छा लगता है तो मुझे दूरियाँ मिटाने  में देर नहीं लगती। अक्सर कुछ बाते हो जाती जिससे वो साथ आ ही जाती थी। अनजान थे एक दूसरे से बिल्कुल वैसे ही जैसे दो मुसाफिर मिलते हैं  किसी मोड़ पर, लेकिन सदियों साथ चलना जो था तो  जान पहचाहन  बनाने  में देर हो जाती कैसे। हम  कुछ ही महीने साथ थे एक दूसरे के लेकिन तब तक कुछ खास जगह तो बना ली थी हमने एक दूसरे के दिलो में, उसे हमराही बनाने में देर हो जाती कैसे।अक्सर कुछ न कुछ चर्चे हुआ करते थे हमारे बारे में और वो अक्सर मुझसे छिपाती थी की कहीं मैं लोगो को कुछ कह न दूं। अब दिल का नात...

Beautiful Lines- Emotions and Actions- Emotional Lines-Think Tank Akhil

Beautiful Lines- Emotions and Actions- Emotional Lines She kept checking my last seen I was waiting for her. She kept checking my breath, My heart was beating for her. She kept looking my way, I was busy with her in my dreams. She kept looking at my features, I was planning my future with her. She kept waiting for Proposal, I was considering her my would be. She kept wishing how should I be, I was changing myself according to her. She was asking for promises, I was thinking to give my words. Only a few things were common that we think or do. We kept waiting for one another for long. Sometimes she used to come late Or sometimes I reach early. She wanted to be mine, I decided to be her, what she would want. ✍️ -Akhilesh Dwivedi Follow Friends, If you like the post, Comment below and do share your response. Thanks for reading :)

वो आखिरी एहसास | Wo Aakhiri Ehsash- Emotional And Sad Love Story-Think Tank Akhil

वो आखिरी एहसास  एक लम्बे अर्शे का हमारा साथ रहा हर सुबह सूरज उसकी बातों के साथ उगा वो हँसती हुई गुड मॉर्निंग की आवाज जब कहती थी वो मिलना है फिर से वहीं आज एक लम्बा वक़्त था जो हमने ऐसे ही गुजरा सब जानते हुए भी वो ना करती थी किनारा। वो हर सुबह मुझे कॉल करके जगाना फिर जगते ही गुड बॉय से सराहना बड़ी जिम्मेदारी से यह हर रोज निभाना उसको होता था पता की जगा हूँ मैं फिर भी मुझे अपनी प्यारी सी मुस्क़ुराहट सुनाना वो लम्बा वक़्त जब हम बस देखते और मुस्कुराते जब भी मिलते खुशियों का हशीन तोहफ़ा दे जाते। सब कुछ ठीक था हमारे दरमियाँ अचानक सागर ने किनारे की तरफ मोड़ दी थी किश्तियाँ वो दिन भी आया जब थी उसकी सगाई न जाने कैसे रात 12 उसकी कॉल आई मजाक में ही मैंने उसको आंटी बुलाया आंटी किसको बोला यह जवाब भी पाया वो आखिरी लम्हाँ था जब मैं उसके साथ था मुस्कुराया। वो बोली मुझे माफ़ करना मम्मी पापा के लिए है यह करना दिल रुआंसा, फिर भी कहा गर्व है मुझे तुम साथ दो उनका यह हक़ है उन्हें। अचानक कमरे में संन्नाटा छा गया सिसकियों की...

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