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कहां तक पहुंचें | Hum Teri Chah Me Kahan Tak Pahuche- Amazing Lines | Think Tank Akhil

हम तेरी चाह में ऐ यार! कहां तक पहुंचें, ना है पता ना ठिकाना की कहां तक पहुंचें। कई रास्ते बदले, मोड़ आए कई, ना जाने किस गली किस जगह पहुंचें। लोग आते रहे, लोग जाते रहे अब रास्ते ना जाने कहां तक पहुंचें। मेरी कामयाबियां गिनाती हैं महफिलें मेरी नाकामियां ना जाने कहां तक पहुंची। मंजिलें भी अपनी थीं, रास्ते भी थे अपने मंजिल दे दिखाई बस उस जगह पहुंचें। आंखों में लिए सपने यूं आगे बढ़ा था पूरा हो सके यह जहां बस वहां पहुंचें। ✍️ -अखिलेश द्विवेदी FOLLOW Friends, If you like the post, Comment below and do share your response. Thanks for reading 😃

उसकी याद में आंखें नम कर के रोया | Usaki Yaad Me Ankhe Nam Karke Roya- Emotional Poem By Akhilesh Dwivedi | Think Tank Akhil

उसकी याद में आंखें नम कर के रोया अकेले राहों में हर कदम पर रोया, तनहाई अकेले नहीं मिटती कभी कभी वो मिला तो उससे बिछड़ कर रोया। बहार आई कई बार उसके दरवाजे पर कभी ओस तो कभी बारिश बनकर रोया। रोज सोया नहीं मै मखमल के बिस्तर पर कभी पत्थर को मखमल समझकर सोया। वो पल नहीं जब वो याद ना आए उसकी यादों के तकिए से लिपटकर रोया। ✍️ -अखिलेश द्विवेदी Follow Friends, If you like the post, Comment below and do share your response. Thanks for reading 😃

Beautiful Emotional Lines-दीपावली बचपन की- Nostalgic- Diwali Special- Think Tank Akhil

दीपावली बचपन की  जब से शहरों की तरफ बढ़ चले हैं हम, वो मिट्टी के दिए और हाथी घोड़े दिखते नहीं। अब ना जाने क्यों दीवाली, दीवाली लगती नहीं। अब वो बचपन के दिन नहीं आते  जब मिट्टी के दियों को हम इकठ्ठा करते थे। वो दिये को लेने के लिए देर तक जागते थे।  वो दिये जिन्हे लेने के लिए कुम्हार के घर तक जाते थे। वो दिये जिनसे बचपन की यादें जुडी हैं, वो दिये जिन्हे हम पडोसी के घर से भी ले आते थे। दिवाली के अगले दिन हम उन्हें सजाते, वही दिये जिनसे हम तराजू बनाते और खेलते।  अब मिट्टी  के दिये बदल गए, सब वक़्त के साथ चल दिए। अब बस बचा है कुछ तो बस दिवाली की छुट्टी, और वो घर में बनने वाली रंगोली। दशहरे से दिवाली के आने का इंतज़ार नहीं रहा, अब लोगो में अपने बचपन वाला प्यार ना रहा।  अब दिवाली बस कैलेंडर की छुट्टी के लिए आती है, अब वो बचपन वाली दिवाली नहीं आती। ✍️ -अखिलेश द्विवेदी Follow Friends, If you like the post, Comment below and do share your response. Thanks for...

ऐ ज़िन्दगी तूने मुझे कुछ इस क़दर तोडा है | Ae Zindagi Tune Mujhe Kuch Is Kadar Toda Hai- Amazing Lines- Think Tank Akhil

अजीब सी हालत में लाकर ऐ जिंदगी तूने छोड़ा है तूने मुझे एक बार फिर से तन्हा कर के छोड़ा है। तुझे मालूम क्या, की तूने क्या खता मैंने दिल कई बार किस तरह से जोड़ा है। ऐ ज़िन्दगी तूने मुझे कुछ इस क़दर तोड़ा है जहाँ है ना कोई रास्ता वहां लाकर के छोड़ा है। मैं अनजान था तुझसे, परेशान था खुद से इसलिए गहरा नाता मैंने तुझसे जोड़ा है। ठुकरा कर मैंने सारी मेरी ख़ुशी, तुझे बेहतर बनाने को मैंने घर भी छोड़ा है। ऐ ज़िन्दगी तूने मुझे कुछ इस क़दर तोड़ा है महलों में रहने वाले को बेघर कर के छोड़ा है। मेरे गम से तू इतना दुखी ना हो ऐ ज़िन्दगी मुझे तूने लड़ने के काबिल कर के छोड़ा है। ✍️ -अखिलेश द्विवेदी Follow Friends, If you like the post, Comment below and do share your response. Thanks for reading 😃

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