Skip to main content

ऐ ज़िन्दगी तूने मुझे कुछ इस क़दर तोडा है | Ae Zindagi Tune Mujhe Kuch Is Kadar Toda Hai- Amazing Lines- Think Tank Akhil

Beautiful Lines- Ae Zindagi Tune Mujhe Kuch Is Kadar Toda Hai- Amazing Lines

अजीब सी हालत में लाकर ऐ जिंदगी तूने छोड़ा है
तूने मुझे एक बार फिर से तन्हा कर के छोड़ा है।

तुझे मालूम क्या, की तूने क्या खता
मैंने दिल कई बार किस तरह से जोड़ा है।

ऐ ज़िन्दगी तूने मुझे कुछ इस क़दर तोड़ा है
जहाँ है ना कोई रास्ता वहां लाकर के छोड़ा है।

मैं अनजान था तुझसे, परेशान था खुद से
इसलिए गहरा नाता मैंने तुझसे जोड़ा है।
ठुकरा कर मैंने सारी मेरी ख़ुशी,
तुझे बेहतर बनाने को मैंने घर भी छोड़ा है।

ऐ ज़िन्दगी तूने मुझे कुछ इस क़दर तोड़ा है
महलों में रहने वाले को बेघर कर के छोड़ा है।

मेरे गम से तू इतना दुखी ना हो ऐ ज़िन्दगी
मुझे तूने लड़ने के काबिल कर के छोड़ा है।

✍️ -अखिलेश द्विवेदी

Follow

Friends, If you like the post, Comment below and do share your response. Thanks for reading 😃

Comments

Visitors

Popular posts from this blog

हर किसी ने मुझे अपने हिसाब से तोला | Har Kisi Ne Mujhe Apne Hisab Se Tola | Think Tank AKhil

हर किसी ने मुझे अपने हिसाब से तोला जिसे जो मिला हर किसी ने कुछ बोला, मैं अच्छा बुरा समझ ना सका  जिससे जितना हो सका सबने अपना मुँह खोला। खुद को बदलने की कोशिशें मैंने तमाम की वक़्त ने जैसे चाहा उस तरह से बदला, लोग आते रहे, मुझको आजमाते रहे जिसने जैसा चाहा, मैं उस तरह से मिला। सुना है आईना झूठ नहीं बोला करता मुझसे मिलकर उसने भी लोगो में ज़हर घोला, मैं चलता रहा मेरे मुकाम की तरफ कामयाबी से पहले नाकामी ने सर चढ़कर बोला मैं शुक्रगुजार हूँ हर किसी का जिस किसी ने जो किया और जो जो बोला, उनके शब्द मेरे लिए थे सच्चे मैंने खुद को खुद ही उनके लिए बदला। हर किसी ने मुझे अपने हिसाब से तोला। ✍️ -अखिलेश द्विवेदी Follow Friends, If you like the post, comment below and do share your response. Thanks for reading 😃

चैन से सोना चाहता हूं- Chain se Sona Chahta hoon | By Akhilesh Dwivedi | Think Tank Akhil

सोना चाहता हूं यह दरवाज़े पर कोई पहरा लगा दो  खुद में खोना चाहता हूं मैं। बंद कर दो सारी खिड़कियां मेरे घर की की अब मैं चैन से सोना चाहता हूं। उसकी ज़रूरत मुझे अभी बहुत है अब उससे दूर होना चाहता हूं। अब कोई दिया रोशन ना करना अंधेरे में खोना चाहता हूं मैं। कुछ नए गम दे जा इन सूखी आंखों को मैं फिर से पलकें भिगोना चाहता हूं। था जिस पतवार का सहारा उसे तोड़ दिया अब यह दरिया सुखाना चाहता हूं। ✍  अखिलेश द्विवेदी Friends, If you like the post, comment below and do share your response. Thanks for reading 😃

Dare to Dream | सपनों का भारत | By Akhilesh Dwivedi | Think Tank Akhil

“जो सोचा था कभी, अब वो हकीकत है”  कभी था एक सपना, किताबों में जो लिखा था, सशक्त, समृद्ध होगा एक सपना अनकहा था। जो देख रहे हैं हम अपनी आँखों के सामने, वो सपना नहीं, वो तब हकीकत की नीव बना था। ना भीड़ है विदेशों की उड़ानों में, ना बेचैनी है पहचान के सवालों में। अब बच्चों का सपना यहीं कुछ बनना है, अब वो बात नहीं विदेशों में पढ़ने जाने में । सड़कों पर दौड़ते हैं अब Hyperloop के रथ, हर गाँव है डिजिटल और साफ़ सुथरा पथ। किसान का बेटा coder, और coder अब किसान, गाँव और मिट्टी का अब साथी बना विज्ञान। AI अब करता सेवा है, और मानव ही राजा है, ड्रोन लाते हैं दवाइयाँ, और चाँद अब खटखटाता दरवाज़ा है। ISRO की उड़ानें अब हौसले मजबूत कर जाती है - ज़मीन या अंतरिक्ष हर तरफ़ अब गर्व से तिरंगा लहराती है। हमारा सैनिक अब exo-suit में रखवाली करता  सीमा पर नहीं - साइबर फ्रंट पर भी देश की ढाल बनता। शक्ति अब केवल तोप और हथियारों की बात नहीं चिप्स, सैटेलाइट और कोड  भी देश की गरिमा बढ़ाता है। अब आस्था की धुन और लैब की मशीनें, एक ही सुर में गाते हैं, अब धर्म और विज्ञान एक ही ज्ञान बताते हैं - शक्ति, श्रद्...