Skip to main content

Posts

Showing posts with the label Emotional Lines

Story of Two Bravehearts | True Love Story- Army | By Akhilesh Dwivedi |Think Tank Akhil

I t has been 4 years since Alpha and Erie were together. Alpha was a defence aspirant and Erie  was a student of Software Engineering. Alpha completed his graduation and came to Delhi for the  preparation of Defence Services. Where he met Erie in an institute and by the time they got  closer. After pursuing a few months, Alpha proposed Erie, but he made his thoughts clear with  his aim and life and told Erie that he wanted to last forever with Erie along with his love for  Nation. Erie was supporting him enough, she agreed to his words.  Let me tell you something about her. Erie, a simple and sober girl with black eyes and long  hair with a cute smiling face and a fair complexion. She looked pretty beautiful when she wore  spectacles and smiled. Her liveliness attracted Alpha and he fell in love with her. A bit about  Alpha, he was an average looking guy with a high sense of humor and attractive with his  positive attitude and a gen...

एक दिन मैं भी फौजी कहलाऊंगा | Ek Din Mai Bhi Fauji Kahelaunga | By Akhilesh Dwivedi | Think Tank Akhil

मैं भी फौजी कहलाऊंगा यह उस वर्दी की चमक है, या उन कदमों की धमक है। यह चांद-तारों की बात है, या फिर कंधों के सितारों की चमक है। एक दिन इनको खुद से जोड़ जाऊंगा, एक दिन मैं भी फौजी कहलाऊंगा। वतन की आन-बान-शान के लिए, मैं मौत से भी लड़ जाऊंगा। वो दिन भी मैें देखूंगा, जब दो मां का बेटा कहलाऊंगा। मेरी अंतिम सांसो से सबको एकजुट कर जाऊंगा, एक दिन मैं भी फौजी कहलाऊंगा। वो गाड़ी वो घर, वो फौजियों का शहर ना दिन की कोई चिंता, ना रात की कोई फिकर। सीने पर हिंदुस्तान का मान लिए, हाथों में तिरंगा, देश की शान लिए। मैं हर बार विजय परचम लहराऊंगा, एक दिन मैं भी फौजी कहलाऊंगा। वो एक दिन घर से दूर मेरा जाना होगा, बटुए में छिपा यादों का खजाना होगा। मां की दुआओ का एक प्यारा चमन होगा, मेरे ऊपर तिरंगे का कफ़न होगा। उस दिन सबकी आंखो से मै ओझल हो जाऊंगा, एक दिन मैं भी फौजी कहलाऊंगा। ✍️ -अखिलेश द्विवेदी Follow Friends, If you like the post, comment below and do share your response. Thanks for reading 😃

जीवन | Emotional and Life Experience | Poem by Akhilesh Dwivedi | Think Tank Akhil

मां की कोख में पलने से हर पल सबका प्यार इस खिलौने से, पहली किलकारी से घर भरने से, दुनिया में पहला कदम रखने तक। फिर समझ आया कि यही जीवन है। वो घर से दूर कहीं निकल जाना थक हार कर वापिस घर आना, मां के हाथों से पक़ा खाना लगता था मिल गया कोई खजाना। फिर समझ आया कि यही जीवन है। वो सबसे दूर कहीं नौकरी की तलाश में करना सबको याद जब कोई ना हो पास में, तरक्की के लिए अपनों को पीछे छोड़ जाना सब मोह छोड़ वापिस मिट्टी में मिल जाना। फिर समझ आया कि यही जीवन है। ✍️ -अखिलेश द्विवेदी Follow Friends, If you like the post, comment below and do share your response. Thanks for reading 😃

मै ऐसा इंसान नहीं | Mai Aisa Insaan Nahi | Motivational Poem By Akhilesh Dwivedi | Think Tank Akhil

मै ऐसा इंसान नहीं मंजिल है मेरी सबसे हसीन चाहे रास्ते है कितने कठिन हार मान जाऊंगा ऐसे मैं ऐसा इंसान नहीं। हार जीत तो एक दिखावा है नित सीखना है कुछ सही इसके डर से छोड़ दू सब मैं ऐसा इंसान नहीं। अब खड़ा हूँ बीच रण में मै विजय से दूर नहीं सपनो को मै अधूरा छोड़ दू मैं ऐसा इंसान नहीं। ✍️ -अखिलेश द्विवेदी Follow Friends, If you like the post, Comment below and do share your response. Thanks for reading 😃

लगता है कि तुम हो | Lagta Hai Ki Tum Ho | Beautiful Thought | Think Tank Akhil

लगता है कि तुम हो  राहत सी जो दे जाए तो लगता है कि तुम हो परछाई कोई लहराए तो लगता है कि तुम हो। जब बारिश के सुहाने मौसम में कोई बूंद टकराए तो लगता है कि तुम हो। काली तन्हाँ रातें जब सताए चैन कहीं ना आए तो लगता है कि तुम हो। समुंदर की बलखाती लहरों में कोई मोती उतर जाए तो लगता है कि तुम हो। कंकरीले पथरीले चट्टानों में कोई झरना बह जाए तो लगता है कि तुम हो। सुनसान गुजरती अकेली राहों में कोई हाल पूछ जाए तो लगता है कि तुम हो। ✍️ -अखिलेश द्विवेदी Follow Friends, If you like the post, comment below and do share your response. Thanks for reading 😃

कहते हैं इसे कोठा | Kotha | A Bitter Truth Of Society | Hindi Poetry | Think Tank Akhil

सूरज के ढलते ही लग जाता है बाजार कोई अता हवस मिटाने, कोई करता सच्चा प्यार, जगह बदलते मतलब बदला, अपना कोई ना होता मिटती है यहां भूख हवस की, कहते हैं इसे कोठा। ना होते हैं माँ बाप, ना होता घर परिवार ना कोई किसी की बेटी, ना किसी भाई का प्यार आता जो भी यहाँ पर बस जिस्म का मतलब होता होता है बाजार जिस्म का, कहते हैं इसे कोठा। सब भूख की बात है प्यारे, चाहे पेट हो या हो तन सब हो जाते हैं गायब, जैसे भरता मन मिट जाती अगर भूख जगत की ऐसा कभी ना होता जिन्दा बिकते मुर्दा बनकर, कहते हैं इसे कोठा।  ✍️ -अखिलेश द्विवेदी Follow Friends, If you like the post, comment below and do share your response. Thanks for reading 😃

कैसे? | Jo Dikh Raha Use Chhipaye kaise | Emotional Lines | Think Tank Akhil

कैसे? जो दिख रहा है उसे छिपाएं कैसे जमाने की चाहत है जो वो बन जाएं कैसे। महफिल लगाना तो बहुत दूर की बात रही फैसला हो की खुद की आबरू बचाएं कैसे। ना जाने कितने आए तोड़ने हौसले जो कभी भुला नहीं उसे भूल जाएं कैसे। मिट्टी की याद मिटा देना आसान नहीं है अपने शहर को छोड़कर कहीं जाए कैसे। लोग रोते रहे, सबको रुलाते रहे खुश आंखों के आंसू को हम छिपाएं कैसे। हर नज़र को ना अच्छे दिखे हम एक बूंद को समंदर नज़र आए कैसे। ✍️ -अखिलेश द्विवेदी Follow Friends, If you like the post, comment below and do share your response. Thanks for reading 😃

She Made Me The Man That I Am- Emotional - Experience | Think Tank Akhil

She Made Me The Man That I Am Today My mother gave me birth, But she made me a man worth. I was nourished by my mom, But she polished my character all in the storm. I had an aggressive nature, She taught me how to be polite. I shouted on her multiple times, But never heard back. I was living life alone in crowed, She brought happiness and made me laugh aloud. When no one was with me, all relations felt a fraud, She was with me in all my odds. I shared with her all my even and odds, She was before me as my life guard. I want to be with her till the end my life, That could be only one who gave meaning to my life. ✍️ - Akhilesh Dwivedi Follow Friends, If you like the post, Comment below and do share your response. Thanks for reading 😃

उसकी याद में आंखें नम कर के रोया | Usaki Yaad Me Ankhe Nam Karke Roya- Emotional Poem By Akhilesh Dwivedi | Think Tank Akhil

उसकी याद में आंखें नम कर के रोया अकेले राहों में हर कदम पर रोया, तनहाई अकेले नहीं मिटती कभी कभी वो मिला तो उससे बिछड़ कर रोया। बहार आई कई बार उसके दरवाजे पर कभी ओस तो कभी बारिश बनकर रोया। रोज सोया नहीं मै मखमल के बिस्तर पर कभी पत्थर को मखमल समझकर सोया। वो पल नहीं जब वो याद ना आए उसकी यादों के तकिए से लिपटकर रोया। ✍️ -अखिलेश द्विवेदी Follow Friends, If you like the post, Comment below and do share your response. Thanks for reading 😃

होगा असर वक़्त के बीत जाने के बाद | Hoga Asar Waqt Ke Beet Jaane Ke Bad- Emotional Lines | Think Tank Akhil

होगा असर वक़्त के बीत जाने के बाद तुम्हे भी होगा असर वक़्त के बीत जाने के बाद कभी तो आऊंगा याद, चले जाने के बाद, खुश तो बहुत थे तुम मुझे पाने के बाद  अब दर्द के भी लुत्फ उठाना मेरे जाने के बाद। यूँ तो हर लम्हा गुजारा था खुशियों में हमने इन पलकों को भीगाना मेरे जाने के बाद, अभी अभी तो सामने था मैं, कब ओझल हो गया असर होगा इसका भी मेरे जाने के बाद। कभी रिश्ते ना संभाले गए तुमसे हमारे अब यादे संभालना तुम मेरे जाने के बाद। ✍️ -अखिलेश द्विवेदी Follow Friends, If you like the post, Comment below and do share your response. Thanks for reading 😃

Beautiful Lines- एक ब्राह्मण ने कहा की यह साल अच्छा होगा- New Year's Hope & Wishes- Think Tank Akhil

एक ब्राह्मण ने कहा की यह साल अच्छा होगा एक ब्राह्मण ने कहा की यह साल अच्छा होगा, उम्मीद करते हैं की उसका कहा सच्चा होगा। सड़को पर भीख मांगता न कोई बच्चा होगा, स्कूल में पढता हर गरीब का बच्चा होगा। हर कोई अपने ही घर की छांव में होगा, पेट भरकर ही हर रोज सभी सोयेंगे। रात में बच्चे न अब भूख से रोयेंगे, प्यार लोगो में अब बढ़ जायेगा। नफ़रतो का सैलाव अब नहीं होगा, अब हर कोई चैन की साँस लेगा। जाति और धर्म का कोई बँटवारा ना होगा, शरहदों पर भी हर तरफ भाईचारा होगा। एक ब्राह्मण ने कहा की यह साल अच्छा होगा, उसने सपनो में जो देखा वो सच्चा होगा। उसके सपनो का भारत जगमगायेगा, फिर से देश का हर शख्श ख़ुशी मनाएगा। ✍️ -अखिलेश द्विवेदी Follow Friends, If you like the post, Comment below and do share your response. Thanks for reading 😃

Beautiful Emotional Lines-दीपावली बचपन की- Nostalgic- Diwali Special- Think Tank Akhil

दीपावली बचपन की  जब से शहरों की तरफ बढ़ चले हैं हम, वो मिट्टी के दिए और हाथी घोड़े दिखते नहीं। अब ना जाने क्यों दीवाली, दीवाली लगती नहीं। अब वो बचपन के दिन नहीं आते  जब मिट्टी के दियों को हम इकठ्ठा करते थे। वो दिये को लेने के लिए देर तक जागते थे।  वो दिये जिन्हे लेने के लिए कुम्हार के घर तक जाते थे। वो दिये जिनसे बचपन की यादें जुडी हैं, वो दिये जिन्हे हम पडोसी के घर से भी ले आते थे। दिवाली के अगले दिन हम उन्हें सजाते, वही दिये जिनसे हम तराजू बनाते और खेलते।  अब मिट्टी  के दिये बदल गए, सब वक़्त के साथ चल दिए। अब बस बचा है कुछ तो बस दिवाली की छुट्टी, और वो घर में बनने वाली रंगोली। दशहरे से दिवाली के आने का इंतज़ार नहीं रहा, अब लोगो में अपने बचपन वाला प्यार ना रहा।  अब दिवाली बस कैलेंडर की छुट्टी के लिए आती है, अब वो बचपन वाली दिवाली नहीं आती। ✍️ -अखिलेश द्विवेदी Follow Friends, If you like the post, Comment below and do share your response. Thanks for...

Love Story- देर हो जाती कैसे- Emotional- Hindi Love Story- Think Tank Akhil

यह सिर्फ कहानी ही नहीं बल्कि दो दिलों की दास्तान है। जिसमे चाहते तो दोनों थे एक दूसरे को लेकिन किसी बात का डर हमेशा रहता। उसकी बड़ी बड़ी ऑंखें और उसके रेशमी बाल अक्सर जो उसके चेहरे पर आ जाते थे उसकी सुंदरता में चार चाँद लगा जाते। वो अक्सर कहती थी तुम बड़े अट्रैक्टिव हो पता नहीं क्यों बस तुम्हारे साथ रहने को दिल चाहता है। अक्सर वो दूरियां  बनाये रखती थी लेकिन जब मुझे पता था की उसे मेरे साथ रहना अच्छा लगता है तो मुझे दूरियाँ मिटाने  में देर नहीं लगती। अक्सर कुछ बाते हो जाती जिससे वो साथ आ ही जाती थी। अनजान थे एक दूसरे से बिल्कुल वैसे ही जैसे दो मुसाफिर मिलते हैं  किसी मोड़ पर, लेकिन सदियों साथ चलना जो था तो  जान पहचाहन  बनाने  में देर हो जाती कैसे। हम  कुछ ही महीने साथ थे एक दूसरे के लेकिन तब तक कुछ खास जगह तो बना ली थी हमने एक दूसरे के दिलो में, उसे हमराही बनाने में देर हो जाती कैसे।अक्सर कुछ न कुछ चर्चे हुआ करते थे हमारे बारे में और वो अक्सर मुझसे छिपाती थी की कहीं मैं लोगो को कुछ कह न दूं। अब दिल का नात...

ऐ ज़िन्दगी तूने मुझे कुछ इस क़दर तोडा है | Ae Zindagi Tune Mujhe Kuch Is Kadar Toda Hai- Amazing Lines- Think Tank Akhil

अजीब सी हालत में लाकर ऐ जिंदगी तूने छोड़ा है तूने मुझे एक बार फिर से तन्हा कर के छोड़ा है। तुझे मालूम क्या, की तूने क्या खता मैंने दिल कई बार किस तरह से जोड़ा है। ऐ ज़िन्दगी तूने मुझे कुछ इस क़दर तोड़ा है जहाँ है ना कोई रास्ता वहां लाकर के छोड़ा है। मैं अनजान था तुझसे, परेशान था खुद से इसलिए गहरा नाता मैंने तुझसे जोड़ा है। ठुकरा कर मैंने सारी मेरी ख़ुशी, तुझे बेहतर बनाने को मैंने घर भी छोड़ा है। ऐ ज़िन्दगी तूने मुझे कुछ इस क़दर तोड़ा है महलों में रहने वाले को बेघर कर के छोड़ा है। मेरे गम से तू इतना दुखी ना हो ऐ ज़िन्दगी मुझे तूने लड़ने के काबिल कर के छोड़ा है। ✍️ -अखिलेश द्विवेदी Follow Friends, If you like the post, Comment below and do share your response. Thanks for reading 😃

Gratitude To Mother- Nostalgic- Maa -Beautiful Emotional Lines- Think Tank Akhil

When I opened my eyes I was in her lap. Her lap was more beautiful than the universe for me. My face used to bloom when I just got a glance of her. A drop from her used to give me life. I used to stretch her hair, I used to hit her with legs. Even she loved me, She adored me more than earlier. I was her good son, I was an apple of her eyes. She used to say the only thing I would be her support in her old age. She made me learn how to walk, She sent me to school every day.   She collected all my ignorance in her heart. She used to be the answer of my all queries. She always made me clear from hurdles. We got older and left her behind, We got our love in someone else. We forgot her affection that was our lifeline. We forgot our life that was her blessings to us. We forgot that she used to be hungry but she fed us first. We forgot that she used to sleep on the drenched bed but made us sleep on the softer side. We forgot that she made us learn to speak. For our bett...

Visitors