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जीवन | Emotional and Life Experience | Poem by Akhilesh Dwivedi | Think Tank Akhil

जीवन | Emotional and Life Experience | Poem by Akhilesh Dwivedi | Think Tank Akhil



मां की कोख में पलने से
हर पल सबका प्यार इस खिलौने से,
पहली किलकारी से घर भरने से,
दुनिया में पहला कदम रखने तक।
फिर समझ आया कि यही जीवन है।

वो घर से दूर कहीं निकल जाना
थक हार कर वापिस घर आना,
मां के हाथों से पक़ा खाना
लगता था मिल गया कोई खजाना।
फिर समझ आया कि यही जीवन है।

वो सबसे दूर कहीं नौकरी की तलाश में
करना सबको याद जब कोई ना हो पास में,
तरक्की के लिए अपनों को पीछे छोड़ जाना
सब मोह छोड़ वापिस मिट्टी में मिल जाना।
फिर समझ आया कि यही जीवन है।

✍️ -अखिलेश द्विवेदी

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