Skip to main content

Bachaane Ki Zarurat Hai- बचाने की ज़रुरत है- Hindi Poetry- Think Tank Akhil

बचाने की ज़रुरत है

बचाने की ज़रुरत है

समंदर ने बचाया पानी
दरख्तो ने बचाए घोसले,
पतवार ने संभाली कस्तियां
मेहनत ने बचाए हौसले।

कांटो ने बचाया फूलों को
रोशनी ने बचाया भूलों को,
भुखमरी से बचाया किसान ने
अतांक से बचाया जवान ने।

मधुमक्खियों ने शहद बचाया
लोगो ने मिलकर शहर बसाया,
संस्कृति को इतिहास ने बचाया
आने वाले कल को हमने आज बचाया।

अब बस ज़रूरत है
इंसान को इंसानियत से मिलाने की
इंसान में इंसानियत बचाने की ज़रुरत है।

✍️ -अखिलेश द्विवेदी

Follow


Friends, If you like the post, Comment below and do share your response. Thanks for reading 😃

Comments

Post a Comment

Visitors

Popular posts from this blog

हर किसी ने मुझे अपने हिसाब से तोला | Har Kisi Ne Mujhe Apne Hisab Se Tola | Think Tank AKhil

हर किसी ने मुझे अपने हिसाब से तोला जिसे जो मिला हर किसी ने कुछ बोला, मैं अच्छा बुरा समझ ना सका  जिससे जितना हो सका सबने अपना मुँह खोला। खुद को बदलने की कोशिशें मैंने तमाम की वक़्त ने जैसे चाहा उस तरह से बदला, लोग आते रहे, मुझको आजमाते रहे जिसने जैसा चाहा, मैं उस तरह से मिला। सुना है आईना झूठ नहीं बोला करता मुझसे मिलकर उसने भी लोगो में ज़हर घोला, मैं चलता रहा मेरे मुकाम की तरफ कामयाबी से पहले नाकामी ने सर चढ़कर बोला मैं शुक्रगुजार हूँ हर किसी का जिस किसी ने जो किया और जो जो बोला, उनके शब्द मेरे लिए थे सच्चे मैंने खुद को खुद ही उनके लिए बदला। हर किसी ने मुझे अपने हिसाब से तोला। ✍️ -अखिलेश द्विवेदी Follow Friends, If you like the post, comment below and do share your response. Thanks for reading 😃

चैन से सोना चाहता हूं- Chain se Sona Chahta hoon | By Akhilesh Dwivedi | Think Tank Akhil

सोना चाहता हूं यह दरवाज़े पर कोई पहरा लगा दो  खुद में खोना चाहता हूं मैं। बंद कर दो सारी खिड़कियां मेरे घर की की अब मैं चैन से सोना चाहता हूं। उसकी ज़रूरत मुझे अभी बहुत है अब उससे दूर होना चाहता हूं। अब कोई दिया रोशन ना करना अंधेरे में खोना चाहता हूं मैं। कुछ नए गम दे जा इन सूखी आंखों को मैं फिर से पलकें भिगोना चाहता हूं। था जिस पतवार का सहारा उसे तोड़ दिया अब यह दरिया सुखाना चाहता हूं। ✍  अखिलेश द्विवेदी Friends, If you like the post, comment below and do share your response. Thanks for reading 😃

Dare to Dream | सपनों का भारत | By Akhilesh Dwivedi | Think Tank Akhil

“जो सोचा था कभी, अब वो हकीकत है”  कभी था एक सपना, किताबों में जो लिखा था, सशक्त, समृद्ध होगा एक सपना अनकहा था। जो देख रहे हैं हम अपनी आँखों के सामने, वो सपना नहीं, वो तब हकीकत की नीव बना था। ना भीड़ है विदेशों की उड़ानों में, ना बेचैनी है पहचान के सवालों में। अब बच्चों का सपना यहीं कुछ बनना है, अब वो बात नहीं विदेशों में पढ़ने जाने में । सड़कों पर दौड़ते हैं अब Hyperloop के रथ, हर गाँव है डिजिटल और साफ़ सुथरा पथ। किसान का बेटा coder, और coder अब किसान, गाँव और मिट्टी का अब साथी बना विज्ञान। AI अब करता सेवा है, और मानव ही राजा है, ड्रोन लाते हैं दवाइयाँ, और चाँद अब खटखटाता दरवाज़ा है। ISRO की उड़ानें अब हौसले मजबूत कर जाती है - ज़मीन या अंतरिक्ष हर तरफ़ अब गर्व से तिरंगा लहराती है। हमारा सैनिक अब exo-suit में रखवाली करता  सीमा पर नहीं - साइबर फ्रंट पर भी देश की ढाल बनता। शक्ति अब केवल तोप और हथियारों की बात नहीं चिप्स, सैटेलाइट और कोड  भी देश की गरिमा बढ़ाता है। अब आस्था की धुन और लैब की मशीनें, एक ही सुर में गाते हैं, अब धर्म और विज्ञान एक ही ज्ञान बताते हैं - शक्ति, श्रद्...